गुरुपूर्णिमा त्यौहार कि पूरी जानकारी Guru Purnima Festival Information In Hindi

Guru Purnima Festival Information In Hindi हॅलो ! आज की पोस्ट में हम गुरुपूर्णिमा के बारे में जानकारी लेने वाले हैं । गुरुपूर्णिमा भारत का सांस्कृतिक और पारंपरिक त्यौहार है। गुरुपूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा , गुरु पूनम , आषाढी़ पूनम इन नामों से भी जाना जाता हैं । गुरुपूर्णिमा का त्यौहार हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं।‌‌

Guru Purnima Festival Information In Hindi

गुरुपूर्णिमा त्यौहार कि पूरी जानकारी Guru Purnima Festival Information In Hindi

” गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥”

हमारे देश में गुरु को भगवान बना जाता है। गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु के लिए मनाया जाता है । इस दिन भारत में स्कूल , काॅलेज और विद्यापीठों में गुरुपूर्णिमा का त्यौहार धुमधाम से मनाया जाता हैं ।‌ गुरु यह एक संस्कृत शब्द हैं । इसमें ‘ गु ‘ का मतलब है अंधेरा और ‘ रु ‘ का मतलब हैं दूर करने वाला ।

मतलब अंधेरा दूर करने वाला । हमारे जीवन में गुरु का होना बहोत महत्वपूर्ण हैं । गुरु की वजह से ही हमारा जीवन सफल होता हैं । गुरु हमें मार्गदर्शन करते हैं । गुरु हमेशा अपने शिष्य की सफलता के लिए प्रयत्न करता रहता हैं । हमारे गुरु का हमें हमेशा सम्मान करना चाहिए । हमारे गुरु का सम्मान करना हमारा कर्तव्य हैं ।

हमारे माता पिता हमारे पहले गुरु होते हैं । हमारे माता पिता ने हमें चलना और बोलना सिखाया । बचपन से हर छोटी छोटी चीज किस तरह से करनी होती है यह सब हमें अपने माता – पिता ने ही सिखाया है । माता – पिता के बाद स्कूल , काॅलेज और विद्यापीठ के गुरु हमारे दुसरे गुरु होते हैं ।

गुरुपूर्णिमा के दिन गुरुओं के प्रती कृतज्ञता प्रकट की जाती हैं । इस दिन अपने गुरु को कुछ भेटवस्तु और फूल देकर गुरु से आशीर्वाद लिया जाता हैं । गुरु हमें सिर्फ किताब से नहीं पढ़ाते हैं बल्की सही मार्गदर्शन करके हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं । गुरु की मदद से हमारा पूरा देश शिक्षित हो रहा हैं ।

गुरुपूर्णिमा क्यों मनाई जाती हैं –

गुरुपूर्णिमा के दिन वेदव्यास का जन्म हुआ था । महाभारत में वेदव्यास का महत्त्वपूर्ण योगदान है । वेदव्यास ने हिंदू धर्म के चारों वेदों की निर्मिती की थी । वेदव्यास ने हिंदू धर्म के लिए श्री महा भगवतगीता की रचना की थी । वेदव्यास के जयंती के उपलक्ष्य में गुरुपूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाता हैं । गुरुपूर्णिमा के दिन गौतम बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था । भगवान शिव ने इस दिन सप्तऋषियों को योग करने का मंत्र दिया था । इसलिए गुरुपूर्णिमा का दिन बहोत महत्वपूर्ण हैं ।

गुरुपूर्णिमा कैसे मनाई जाती हैं –

गुरुपूर्णिमा के दिन जो विद्यार्थी स्कूल और काॅलेज में पढ़ रहे हैं वह पहले अपने गुरु को उपहार और फूल देकर उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेते हैं और गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हैं । इस दिन स्कूल और कॉलेजों में भाषण भी आयोजित किये जाते है ।इसके द्वारा विद्यार्थी अपने गुरुओं के प्रती कृतज्ञता प्रकट करते हैं । पुराणों के अनुसार भगवान शिव की गुरुपूर्णिमा के दिन पूजा जरुर करनी चाहिए ।

उन्होंने सृष्टी को बनाया हैं और सृष्टी पर धर्म और सभ्यता का प्रचार किया हैं । उनको आदिगुरु भी कहा जाता हैं । प्राचीन समय में गुरु अपने आश्रम में अपने शिष्यों को मुफ्त में शिक्षा देते थे । उस समय सभी शिष्य अपने गुरु के लिए गुरुपूर्णिमा के दिन पूजन आयोजित करते थे ‌। जो गुरु दिवंगत हो गये हैं उनके लिए उनके शिष्य उनके पादुकाओं की पूजा करते हैं ।

गुरुपूर्णिमा की पूजा विधी –

कई शिष्यों ने अपने गुरु से दिक्षा ली हुई होती हैं । उस शिष्यों को गुरुपूर्णिमा के दिन उत्तर दिशा में अपने गुरु का फोटो रखना चाहिए । इस दिन गुरु के प्रतिमा को सफेद वस्त्र पहनाने चाहिए । इसके बाद गुरु के फोटो को फूलों की माला पहनाए और इसके बाद मिठाई का भोग लगाये । इसके बाद गुरु की आरती करें और आशिर्वाद ले । इस दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए । इस दिन गुरु की पूजा में चंदन , फूल और अक्षत का इस्तेमाल करना चाहिए ।

गुरूपूर्णिमा के कविता , दोहे और उनके अर्थ –

1 ) ” गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥”

इसका मतलब है , गुरु ही विष्णु हैं , जो अपने शिष्यों की हमेशा रक्षा करता हैं , गुरु ही शंकर हैं , गुरु ही परब्रम्ह हैं , गुरु अपने शिष्य को सभी बुराइयों और दोषों से दूर करता हैं । में गुरु का बार – बार नमन करता हूं ।

2 ) ” गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागूं पाँय।
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय॥”

यह संत कबीर दास जी का दोहा हैं । इस दोहे में कहा हैं की अगर गुरु और गोविंद दोनों एक साथ खड़े हैं तो हमें किसे प्रणाम करना चाहिए । इस दोहे में ऐसे बताया हैं की हमें पहले गुरु के चरणों में झुकना चाहिए । क्योंकी उन्होंने ही हमें भगवान तक जाने का रास्ता दिखाया हैं ‌।

3 )” हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहिं ठौर॥”

इसका मतलब है की भगवान के रुठने पर गुरु के शरण रक्षा कर सकते हैं लेकिन गुरु के रुठने पर हमें कहीं भी शरण नहीं मिल सकता । इस लिए गुरु की आज्ञा का पालन करना चाहिए और गुरु के बताये हुए मार्ग पर चलना चाहिए ।

4 ) ” ज्ञान समागम प्रेम सुख,
दया भक्ति विश्वास।
गुरु सेवा ते पाइए,
सद् गुरु चरण निवास।। ”

इसका मतलब है की ज्ञान , निर्वासनिक सुख , गुरू के चरण में निवास यह सब गुरु की सेवा करने से ही प्राप्त होता हैं । इसलिए हमें हमारे गुरु का सम्मान करना चाहिए ।

5 ) “पंडित यदि पढि गुनि मुये,
गुरु बिना मिलै न ज्ञान।
ज्ञान बिना नहिं मुक्ति है,
सत्त शब्द परमान।।”

इसका मतलब ऐसा हैं की बडे़ – बड़े विद्वान शास्त्रों को पढ़कर – लिखकर ज्ञानी बन सकते हैं । लेकिन गुरु के सही मार्गदर्शन के बिना उन्हें मोक्ष प्राप्ती नहीं हो सकती ।

इस पोस्ट में हमने गुरुपूर्णिमा के बारे में जानकारी ली । हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजीए । धन्यवाद !

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