करवाचौथ त्यौहार पूरी जानकारी Karwachauth Information In Hindi

Karwachauth Information In Hindi करवाचौथ हिंदू लोगों का प्रमुख त्यौहार हैं । यह त्यौहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता हैं । यह त्यौहार विवाहित स्त्रियां मनाती हैं । यह त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता हैं । यह त्यौहार राजस्थान , हिमाचल प्रदेश , जम्मू , उत्तराखंड , पंजाब , हरियाणा , उत्तरप्रदेश , मध्यप्रदेश , दिल्ली में मनाया जाता हैं । विवाहित स्त्रिया अपने पती के लंबी आयु की कामना करने के लिए यह व्रत रखती हैं ।

Karwachauth Information In Hindi

करवाचौथ त्यौहार पूरी जानकारी Karwachauth Information In Hindi

करवाचौथ त्यौहार का इतिहास –

1 ) वीरवती की कहानी –

वीरवती की कहानी करवाचौथ त्यौहार की मुख्य कहानी हैं । विवाह के बाद वीरवती अपना पहला करवाचौथ का व्रत मनाने के लिए मायके आई थी । वीरवती ने विधी – विधान से करवाचौथ का व्रत रखा था । संध्या के समय वीरवती भुक से व्याकुल हो गई थी । जब वीरवती के भाई काम से घर आये तब उन्होंने वीरवती को कमजोर देखा ।

वीरवती के भाई ने पीपल के वृक्ष के पीछे दीपक की रोशनी को चंद्रमा कहा और अपने बहन का व्रत तोड़ दिया । व्रत तोडने के बाद वीरवती के पती की मृत्यु हो गई । अपने पती के मृत्यु का समाचार सुनने के बाद वीरवती बहोत दु:खी हो गई । वीरवती ने माता पार्वती के आदेश पर करवाचौथ का व्रत विधी विधान से किया और अपने पती को पुनर्जीवित किया ।

2 ) द्रौपदी की कहानी –

एक दिन अर्जुन नीलगिरी के पहाड़ियों पर गए हुए थे । उस वक्त बाकी चार पांडवों को राज्य को संभालने में बहोत मुश्किल हो रही थी । पांच पांडवों की एक ही पत्नी थी उसका नाम द्रौपदी था । उसको अर्जून की बहोत चिंता हो रही थी ‌। द्रौपदी चार पांडवों की समस्या देखकर भी व्याकुल हो रही थी ।

द्रौपदी ने अपनी समस्या श्रीकृष्ण को बताई । श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को कहा था की एक बार यह समस्या माता पार्वती को भी थी । तब माता पार्वती ने करवाचौथ का व्रत किया था और उनकी सभी समस्या दूर हो गई थी । यह सुनकर द्रौपदी ने करवाचौथ का व्रत किया । करवाचौथ का व्रत करने के बाद अर्जून भी कुछ समय के बाद सकुशल लौट आये और पांडवों की भी समस्या हल हो गई ।

3 ) देवताओं की कहानी –

प्राचीन कथाओं के अनुसार करवाचौथ का त्यौहार देवताओं के समय से चल रहा हैं । एक बार देवताओं के और दानवों के बीच युद्ध हुआ था । इस युद्ध में देवताओं की हार हो रही थी । देवताओं को कुछ समझ नहीं आ रहा था । इसके बाद देवता ब्रम्हदेव के पास अपनी समस्या लेकर गये ।

देवताओं ने अपने समस्या का समाधान मांगा और रक्षा की प्रार्थना की । तब ब्रम्हदेव ने सभी देवताओं को एक मार्ग बताया की पत्नीयों को अपने पती के लिए व्रत रखना चाहिए और पतीयों के विजय के लिए प्रार्थना करनी चाहिए । ब्रम्हदेव ने ऐसा वचन भी दिया की ऐसा करने के बाद इस युद्ध में देवताओं की जीत होगी ।

ब्रम्हदेव का यह सुझाव सभी पती और पत्नीयों ने खुशी से स्वीकार किया । जैसे ब्रम्हदेव ने कहा उसके अनुसार देवताओं की पत्नीयों ने कार्तिक माह की चतुर्थी को अपने पती के विजय के लिए व्रत रखा और पतीयों के विजय के लिए प्रार्थना की ।

सभी पत्नीयों की प्रार्थना स्वीकार हुई और इसके बाद युद्ध में सभी पती जीत गये । यह खुशखबर सुनने के बाद सभी देवताओं की पत्नीयोंने अपना व्रत खोला और खाना खाया । उस समय आकाश में चांद भी निकल के आया था । ऐसी मान्यता हैं की इसी दिन से करवाचौथ के त्यौहार की शुरुआत हुई ।

4 ) करवा नाम के स्त्री की कथा –

एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री थी । वह अपने पती के साथ किनारे के गांव में रहती थी । एक दिन उसका पती नदी में स्नान करने गया था । स्नान करते समय मगर ने उसका पैर पकड लिया । वह मनुष्य करवा करवा कहकर अपने पत्नी को पुकारने लगा । उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागकर उसके पती के पास आ गई और उसने मगर को कच्चे धागे से बांध दिया ।

वह मगर को बांधकर यमराज के पास गई और उसने यमराज को कहा की इस मगर को आप नरक लेकर जाओ । यमराज ने कहा की अभी उसकी आयु शेष हैं में उसे लेकर नहीं जा सकता । करवा ने कहां की में आपको शाप दूंगी । उसकी बात सुनकर यमराज डर गये और उन्होंने मगर को यमपुरी भेज दिया और करवा के पती को दीर्घायु दी ।

करवाचौथ के व्रत के लिए सामग्री –

करवाचौथ के व्रत के लिए पुष्प , चंदन , शहद , अगरबत्ती , शक्कर , कच्चा दूध , शुद्ध घी , मिठाई , दही , अक्षत , सिंदूर , गंगाजल , कंघा , महावर , मेहंदी , चुनरी , बिंदी , बिछुआ , चूड़ी , दीपक , मिट्टी का टोंटीदार करवा और ढक्कन , कपूर , रूई , शक्कर का बूरा , गेंहू , जल का लोटा , हल्दी , लकड़ी का आसन , गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी , आठ पूरियों की अठावरी , चलनी , दक्षिणा के लिए पैसे , हलुआ यह सामन लगता हैं ।

करवाचौथ के व्रत की विधी –

करवाचौथ का व्रत करने से पहले करवाचौथ की सामग्री एकत्रित करें । अरवाचौथ के व्रत के दिन स्नान करके ‘ मम सुख-सौभाग्य पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये । ‘ यह संकल्प बोलकर करवाचौथ के व्रत का आरंभ करे । इस दिन दिवार पर गेरू से फलक बनाके पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करे ।

इसे वर कहा जाता हैं ।‌ चित्रित करने की कला को करवा धरना कहते हैं । इसके बाद आठ पूरियों की अठावरी , हलुआ और पक्के पकवान बनाए । पिली मिट्टी का इस्तेमाल करके गौरी बनाए और गौरीजी के गोद में गणेशजी को बिठाए । अब गौरीजी को आसन पर रखे और चौक बनाकर आसन को उसपर रखे ।

गौरीजी को अच्छे से चुनरी ओढ़कर उसके बाद बिंदी और अन्य सुहाग के सामग्री से गौरी का श्रृंगार करे । उसके बाद जल से भरा हुआ लोटा रखे। इसके बाद वायना देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लेकर उसमें गेंहू और ढक्कन में शक्कर का बूरा भरकर रखे । उसके उपर दक्षिणा रखे । इसके बाद उस करवे पर रोली से स्वस्तिक बनाए ।

इसके बाद गौरी – गणेश और चित्रित किये हुए करवा की पूजा करके पती की दीर्घायु की कामना करे । ‘ नमः शिवायै शर्वाण्ये सौभाग्यं संतति शुभाम । प्रयच्छ भक्तीयुक्तानां नारीणां हरवल्लभे ।।’ यह मंत्र बोले ‌। करवा पर 13 बिंदी रखकर गेंहू या चावल के 13 दाने हाथ में लेने के बाद करवाचौथ की कथा कहे और सुने । कथा सुनने के बाद करवा हाथ पे घुमाके अपने सासुजी के पैर छूकर और आशीर्वाद लेकर करवा उनको दे ।

तेरह गेंहू के दाने और टोंटीदार करवा अलग रखे । इस दिन पूरा दिन निर्जला व्रत करे । रात के समय चंद्रमा निकलने का इंतजार करें और जब चंद्रमा निकलेगा तब छलनी की ओट से उसे देखकर चंद्रमा को अर्घ्य दे । इसके बाद अपने पती से आशीर्वाद लेकर अपने पती को भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करे ।

यह लेख अवश्य पढ़े –

Leave a Comment