महादेवी वर्मा की जीवनी Mahadevi Verma Biography in Hindi

Mahadevi Verma Biography in Hindi बेबाक सजग सहज हिंदी साहित्य की एक अदभुत प्रतिभा ममतामयी म्य्सी महादेवी वर्मा। वो ऐसी ही थी वो ना सिर्फ अपने अधिकार के लिए लड़ना जानती थी बल्कि उन्होंने देशभर की महिलाओ को उनके अधिकार बताए अधिकारों के लिए लड़ना सिखाया। महादेवी वर्मा जी ने हिंदी साहित्य जगत में एक बेहतरीन गद्य लेखिका के रुप में अपनी पहचान बनाई थी।

जिन्होंने जीवन के करुण भाव को अभिव्यक्ति दी, जिन्होंने करुणा की अभिव्यक्ति को नए शब्द दिए, जिन्होंने शब्दों को नए आयाम और आकाश दिए। जिन्होंने हिंदी साहित्य के आकाश में आंसू से भीगे करुण गीतों के सितारे पाए। उन्हें हिन्दी साहित्य के सभी महत्त्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है। गत शताब्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय महिला साहित्यकार के रूप में वे जीवन भर बनी रहीं। वे भारत की 50 सबसे यशस्वी महिलाओं में भी शामिल हैं। महादेवी वर्मा और सुभद्रा कुमारी चौहान के बीच बचपन से मित्रता थी।

Mahadevi Verma Biography in Hindi

महादेवी वर्मा की जीवनी Mahadevi Verma Biography in Hindi

प्रारंभिक जीवन :-

महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च, 1907 को होली के दिन फरुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। आपकी प्रारंभिक शिक्षा मिशन स्कूल, इंदौर में हुई। महादेवी 1929 में बौद्ध दीक्षा लेकर भिक्षुणी बनना चाहतीं थीं, लेकिन महात्मा गांधी के संपर्क में आने के बाद आप समाज-सेवा में लग गईं। 1932 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए करने के पश्चात आपने नारी शिक्षा प्रसार के मंतव्य से प्रयाग महिला विद्यापीठ की स्थापना की व उसकी प्रधानाचार्य के रुप में कार्यरत रही। मासिक पत्रिका चांद का अवैतनिक संपादन किया।

महादेवी जी की शिक्षा :-

महादेवी जी ने शुरुवाती शिक्षा इंदौर के मिशन स्कूल प्राप्त हुयी है। उनको संस्कृत, अंग्रेज़ी, संगीत तथा चित्रकला की शिक्षा अध्यापकों द्वारा घर पर ही दी थी। 1919 में क्रास्थवेट कॉलेज इलाहाबाद में प्रवेश लिया और कॉलेज के छात्रावास में रहने लगीं। 1925 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और 1932 में जब उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम॰ए॰ पास किया तब तक उनके दो कविता संग्रह नीहार तथा रश्मि प्रकाशित हो चुके थे।

वैवाहिक जीवन :-

नवाँ वर्ष पूरा होते होते सन् 1916 में उनके बाबा श्री बाँके विहारी ने इनका विवाह बरेली के पास नबाव गंज कस्बे के निवासी श्री स्वरूप नारायण वर्मा से कर दिया, जो उस समय दसवीं कक्षा के विद्यार्थी थे। महादेवी जी का विवाह उस उम्र में हुआ जब वे विवाह का मतलब भी नहीं समझती थीं। उन्हीं के अनुसार- “दादा ने पुण्य लाभ से विवाह रच दिया, पिता जी विरोध नहीं कर सके। बरात आयी तो बाहर भाग कर हम सबके बीच खड़े होकर बरात देखने लगे। व्रत रखने को कहा गया तो मिठाई वाले कमरे में बैठ कर खूब मिठाई खाई। रात को सोते समय नाइन ने गोद में लेकर फेरे दिलवाये होंगे, हमें कुछ ध्यान नहीं है।

प्रात: आँख खुली तो कपड़े में गाँठ लगी देखी तो उसे खोल कर भाग गए।”महादेवी वर्मा के व्यक्तित्व में संवेदना दृढ़ता और आक्रोश का अद्भुत संतुलन मिलता है। वे अध्यापक, कवि, गद्यकार, कलाकार, समाजसेवी और विदुषी के बहुरंगे मिलन का जीता जागता उदाहरण थीं। वे इन सबके साथ-साथ एक प्रभावशाली व्याख्याता भी थीं। उनकी भाव चेतना गंभीर, मार्मिक और संवेदनशील थी। उनकी अभिव्यक्ति का प्रत्येक रूप नितान्त मौलिक और हृदयग्राही था।

कार्यक्षेत्र :-

महादेवी वर्मा जी ने अध्यापन से अपने कार्यक्षेत्र की शुरुआत की और वह अंत तक प्रयाग महिला विश्वपीठ की प्राध्यापक रहीं। महादेवी वर्मा ने यूँ तो कहानियां नहीं लिखीं लेकिन इनके संस्मरण, रेखाचित्र, निबंधों में गज़ब का चित्रण मिलता है। महिला समाज सुधारक के रूप में भी महादेवी वर्मा ने कई कार्य किये। इन्होंने ही सबसे पहले महिला कवि सम्मेलन की शुरुआत की। भारत का पहला महिला कवि सम्मेलन सुभद्रा कुमारी चौहान की अध्यक्षता में प्रयाग महिला विद्यापीठ में महादेवी जी के संयोजन से सम्पूर्ण हुआ।

कृतियाँ :-

महादेवी वर्मा की कवितायेँ इस प्रकार हैं –

1. नीहार (1930)
2. रश्मि (1931)
3. नीरजा (1934)
4. सांध्यगीत (1936)
5. दीपशिखा (1942)
6. सप्तपर्णा (अनूदित-1959)
7. प्रथम आयाम (1974)
8. अग्निरेखा (1990)

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